हरियाणा के करनाल सिविल अस्पताल के SNCU (Special Newborn Care Unit) वार्ड में अचानक आग लगने से भयानक अफरातफरी मच गई। लेकिन नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों की त्वरित कार्रवाई (Swift Action) से वार्ड में भर्ती सभी 10 नवजातों (Newborns) को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर लिया गया है। किसी भी बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, और सभी की मेडिकल स्थिति पूरी तरह स्थिर (Stable) है।

Karnal Civil Hospital Fire 2026: घटना की मुख्य जानकारी
हादसे और रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़ी सबसे अहम जानकारी इस टेबल में स्पष्ट रूप से दी गई है:
| विवरण (Details) | जानकारी (Information) |
| हादसे की जगह | Karnal Civil Hospital, Haryana |
| वार्ड का नाम | SNCU (Special Newborn Care Unit) |
| आग लगने का कारण | शॉर्ट सर्किट (शुरुआती जांच के अनुसार) |
| रेस्क्यू किए गए बच्चे | सभी 10 नवजात (Newborns) सुरक्षित |
| रेफर किए गए मरीज | 4 बच्चों को KCGMC शिफ्ट किया गया |
| जांच टीम | PMO द्वारा सीनियर डॉक्टरों की कमेटी गठित |
Karnal Civil Hospital Fire Incident: क्या हुआ SNCU वार्ड में?
अस्पताल के प्रत्यक्षदर्शियों (Eyewitnesses) के अनुसार, वार्ड के अंदर ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक पैनल के पास शॉर्ट सर्किट होने के कारण स्पार्किंग हुई और तुरंत बाद घना धुआं (Thick Smoke) भर गया। जिस समय यह घटना हुई, उस समय SNCU वार्ड में 10 नवजात बच्चे भर्ती थे, जिन्हें गहन चिकित्सा (Intensive Care) दी जा रही थी। धुआं उठते ही ऑक्सीजन के संपर्क में आकर आग तेजी से फैल सकती थी, लेकिन स्टाफ ने बिना समय गंवाए इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर दिया।
How 10 Newborns Safely Evacuated? स्टाफ ने कैसे बचाई जान?
आग का अलार्म बजते ही वार्ड में मौजूद नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने सबसे पहले मेन ऑक्सीजन लाइन के वाल्व को बंद किया ताकि आग को ईंधन न मिले। इसके बाद, मात्र कुछ ही मिनटों के भीतर, उन्होंने एक-एक करके सभी 10 वार्मर्स (Warmers) में रखे बच्चों को धुएं से सुरक्षित बाहर निकाला। इन सभी नवजातों को अस्पताल के उस दूसरे वार्ड में तुरंत शिफ्ट किया गया, जहां पहले से ही सुरक्षित ऑक्सीजन फैसिलिटी (Oxygen Facilities) उपलब्ध थी। स्टाफ की इसी फुर्ती ने एक बेहद जानलेवा हादसे को टाल दिया।
KCGMC Medical College में क्यों Shift किए गए 4 बच्चे?
करनाल सिविल अस्पताल की Principal Medical Officer (PMO) डॉ. सरिता बिश्नोई ने आधिकारिक पुष्टि की है कि सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी को भी आंच नहीं आई है। हालांकि, एहतियात (Precautionary Measure) के तौर पर 4 बच्चों को बेहतर और एडवांस केयर के लिए पास के Kalpana Chawla Government Medical College (KCGMC) में शिफ्ट किया गया है। शेष 6 बच्चों का इलाज सिविल अस्पताल के ही दूसरे सुरक्षित विंग में सुचारू रूप से जारी है।
Committee Formed for Investigation: आगे क्या एक्शन लिया गया?
हादसे की गंभीरता को देखते हुए, PMO डॉ. बिश्नोई ने घटना की असल वजह (Actual Cause) का पता लगाने के लिए सीनियर डॉक्टरों की एक विशेष जांच कमेटी (Investigation Team) का गठन कर दिया है। यह टीम Haryana Health Department के दिशा-निर्देशों के तहत इलेक्ट्रिकल लोड, वेंटिलेटर पैनल की सर्विसिंग हिस्ट्री और फायर सेफ्टी अलार्म के काम करने की क्षमता की विस्तृत जांच करेगी।
Why SNCU Wards are Highly Vulnerable to Fire?
SNCU और NICU वार्डों में 24 घंटे भारी इलेक्ट्रिकल उपकरणों (रेडिएंट वार्मर, फोटोथेरेपी यूनिट्स) का इस्तेमाल होता है। यहां सेंट्रलाइज्ड ऑक्सीजन सप्लाई होने के कारण हमेशा एक ज्वलनशील (Combustible) वातावरण बना रहता है। ऑक्सीजन एक ऑक्सीडाइजर (Oxidizer) है, जो छोटी सी चिंगारी को भी भयंकर आग में बदल सकता है। Ministry of Health and Family Welfare की सुरक्षा गाइडलाइंस यह स्पष्ट रूप से अनिवार्य करती हैं कि ऐसे वार्डों में स्मोक डिटेक्टर्स (Smoke Detectors) हमेशा एक्टिव रहने चाहिए और वायरिंग उच्च गुणवत्ता की होनी चाहिए।
Hospital Fire Safety: आग लगने पर बचाव के 4 Rules
मेडिकल फायर इमरजेंसी के समय National Disaster Management Authority (NDMA) द्वारा निर्धारित इन नियमों का पालन करना जीवनरक्षक साबित होता है:
- Do Not Panic (घबराएं नहीं): ऐसी स्थिति में सबसे पहले अलार्म बजाएं। भगदड़ मचाने से रेस्क्यू ऑपरेशन धीमा हो जाता है।
- Cut Oxygen & Power (सप्लाई बंद करें): आईसीयू या SNCU में ऑक्सीजन सिलेंडर और मेन पावर सप्लाई तुरंत बंद करें ताकि आग और न भड़के।
- Use Emergency Exits (सुरक्षित निकासी): मरीजों को स्ट्रेचर या व्हीलचेयर पर बाहर निकालते समय लिफ्ट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। केवल अस्पताल के इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exit) और रैंप का उपयोग करें।
- Fire Extinguishers (अग्निशामक का प्रयोग): वार्ड में मौजूद स्टाफ को फायर एक्सटिंग्विशर (Fire Extinguisher) चलाने का नियमित प्रशिक्षण (Mock Drill) दिया जाना चाहिए, जो ऐसे हादसों में सबसे पहले काम आता है।
