केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 22 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के करनाल (तरावड़ी) से ‘खेत बचाओ अभियान 2026’ की शुरुआत की है। इसका सीधा मकसद किसानों को पराली (Paddy Straw) जलाने से रोकना और उस कचरे को आमदनी का जरिया बनाना है। अब किसान अपने खेत में बची हुई पराली को जलाने के बजाय औद्योगिक इकाइयों को ₹200 से ₹250 प्रति क्विंटल की दर से बेच सकते हैं।
अक्सर खरीफ (धान) की कटाई और रबी (गेहूं) की बुवाई के बीच सिर्फ 20 से 25 दिन का समय बचता है। समय की कमी के कारण किसान खेत खाली करने के लिए जल्दबाजी में फसल अवशेषों को आग लगा देते हैं। सरकार की इस नई पहल से अब न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि किसानों को अपनी ही पराली से सीधा आर्थिक लाभ भी मिलेगा।
Khet Bachao Abhiyaan 2026: Highlights (एक नजर में)
इस 40 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान से जुड़ी सबसे अहम जानकारी इस टेबल में स्पष्ट रूप से दी गई है।
| विवरण (Details) | जरूरी जानकारी (Information) |
| अभियान का नाम | खेत बचाओ अभियान – रबी 2026 |
| शुरुआत की जगह | तरावड़ी, करनाल (हरियाणा) |
| शुभारंभ किसने किया | केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान |
| अभियान की अवधि | 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 (40 दिन) |
| पराली का सरकारी रेट | ₹200 से ₹250 प्रति क्विंटल |
Paddy Straw बेचकर ₹250 प्रति क्विंटल कैसे कमाएं? (Step-by-Step)
पराली को खेत में जलाने की बजाय उसे बेचकर सीधा मुनाफा कमाने के लिए सरकार ने आधुनिक मशीनों और उद्योगों का एक सीधा नेटवर्क तैयार किया है।
- आधुनिक मशीनों का उपयोग: सबसे पहले कटर (Cutter) मशीन से धान की कटाई करें। इसके बाद रेक (Rake) की मदद से पूरे खेत की पराली को एक जगह इकट्ठा करें। अंत में बेलर (Baler) मशीन से इस पराली के गोल या चौकोर मजबूत बंडल बना लें।
- मशीनों पर भारी सब्सिडी: जो किसान यह महंगी मशीनें नहीं खरीद सकते, वे Department of Agriculture & Farmers Welfare द्वारा बनाए गए कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHC) से बेहद मामूली किराए पर इन्हें प्राप्त कर सकते हैं।
- सीधी बिक्री (Direct Sale): पराली के इन बंडलों को सीधा थर्मल पावर प्लांट्स, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट्स और 2G इथेनॉल फैक्ट्रियों को बेचा जाएगा।
- सरकार और फैक्ट्रियां इन बंडलों को सीधे खेत से उठाकर ₹200 से ₹250 प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान कर रही हैं।

Stubble Burning से खेत और मिट्टी को क्या नुकसान होता है?
पराली जलाने से केवल जहरीला धुआं ही पैदा नहीं होता, बल्कि यह खेत की उपजाऊ क्षमता को अंदर से पूरी तरह खोखला कर देता है।
- मित्र कीटों की मौत: खेत में आग लगने से मिट्टी में मौजूद केंचुए और फायदेमंद कीट (Beneficial Insects) पूरी तरह जलकर मर जाते हैं।
- मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट: उच्च तापमान के कारण जमीन का ऑर्गेनिक कार्बन और सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) नष्ट हो जाते हैं। इससे अगली फसल उगाने के लिए किसानों को ज्यादा महंगी रासायनिक खाद डालनी पड़ती है।
- खतरनाक प्रदूषण: पराली का धुआं सर्दियों में हवा की गुणवत्ता (AQI) को बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंचा देता है। आप अपने इलाके का रियल-टाइम प्रदूषण स्तर Central Pollution Control Board (CPCB) की वेबसाइट पर सीधा ट्रैक कर सकते हैं।
पराली के सही प्रबंधन के 3 स्मार्ट तरीके (Smart Alternatives)
कृषि मंत्रालय ने पराली जलाने (Stubble Burning) की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए तीन अन्य बड़े विकल्प भी किसानों के सामने रखे हैं:
- कम अवधि वाली धान की किस्में: किसानों को Pusa-44 जैसी लंबी अवधि वाली किस्मों की जगह Pusa 2090 और PR126 जैसी उन्नत बीज किस्मों का उपयोग करना चाहिए। यह फसलें जल्दी पक कर तैयार हो जाती हैं, जिससे गेहूं की बुवाई के लिए खेत खाली करने का 10 से 15 दिन अतिरिक्त समय मिल जाता है।
- सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए चारा: बेची न जा सकने वाली अतिरिक्त पराली को सूखा प्रभावित इलाकों में पशुओं के चारे (Fodder) के रूप में स्टोर करके सप्लाई किया जा सकता है।
- कार्बन क्रेडिट (Carbon Credits) से अतिरिक्त आय: जो किसान स्थायी कृषि तकनीकों (Sustainable Agriculture) को अपनाएंगे और खेत में आग नहीं लगाएंगे, सरकार उन्हें ग्लोबल कार्बन क्रेडिट सिस्टम के जरिए अतिरिक्त नकद आय देने की योजना पर काम कर रही है।
Karnal Kisan Choupal: कृषि मंत्री का किसानों के लिए सीधा संदेश
तरावड़ी में आयोजित ‘किसान चौपाल’ में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से सीधा संवाद किया। कार्यक्रम में उनके साथ हरियाणा के नवनियुक्त कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा भी मौजूद थे।
शिवराज सिंह चौहान ने मंच से स्पष्ट किया कि वे कोई बड़े नेता नहीं, बल्कि किसानों के सेवक हैं। उन्होंने किसान की पगड़ी को उसके मान-सम्मान का सबसे बड़ा प्रतीक बताया और भरोसा दिलाया कि इस सम्मान पर कभी आंच नहीं आने दी जाएगी।
सरकार का मुख्य फोकस खेती में आधुनिकता और परंपरा का सही तालमेल बिठाना है। कृषि कचरे को बायोमास और ग्रीन एनर्जी में बदलकर Ministry of New and Renewable Energy के सहयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नया ऊर्जा विकल्प दिया जा रहा है।
अगर आप हरियाणा या पंजाब के किसान हैं, तो आज ही अपने नजदीकी कृषि अधिकारी या Haryana Government Portal पर संपर्क करके बेलर मशीन बुक करें। पराली को आग लगाकर अपनी मिट्टी को बंजर बनाने के बजाय, उसे बेचकर नकद आमदनी कमाएं।
